नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट नहीं होगा हाईकोर्ट! ऋषिकेश में खोली जा सकती है बेंच


हल्द्वानी- करीब एक वर्ष से उत्तराखंड हाईकोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार में शिफ्ट किए जाने की कवायद चल रही है। जिसके लिए जमीन भी तलाश ली गई। लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने गौलापार में इसके लिए अनुमति अटका दी। वन भूमि हस्तातंरण का प्रस्ताव केंद्र की हाई इम्पावर्ड कमेटी ने खारिज कर दिया।
आरईसी के सदस्यों ने राज्य सरकार से राजस्व भूमि पर कम क्षेत्र घेरने वाली बहु-मंजिली इमारत के साथ कंक्रीट और ग्रीन फुटफॉल का उल्लेख करते हुए एक स्पष्ट लेआउट तैयार करने को कहा है।
इसके बाद सचिव पंकज कुमार पांडेय ने नैनीताल जिलाधिकारी वंदना सिंह को 20 फरवरी को लिखे पत्र में कहा कि हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। पत्र में आरईसी की बैठक के प्रस्ताव का विवरण देकर शासन को अवगत कराने को कहा है। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि तत्काल राजस्व भूमि की उपलब्धता के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए शासन को अवगत कराएं।
वहीं बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऋषिकेश स्थित IDPL क्षेत्र में हाईकोर्ट की बेंच शिफ्ट करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश जारी होते ही हाईकोर्ट बार उबल पड़ी। इससे वकीलों में भारी रोष है। सभी अधिवक्ता मुख्य न्यायाधीश से मिले तो दोपहर दो बजे वार्ता का समय तय हुआ।
हरिद्वार जिले में ऋषिकेश स्थित इंडियन ड्रग्स एंड फार्मासूटिकल लिमिटेड (आईडीपीएल) की कुछ याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ में सुनवाई चल रही थी। इस याचिका में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी भी मामले में ऑनलाइन जुड़ी थी।
सुनवाई के बाद आर्डर लिखाते समय मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट को गौलापार शिफ्ट करने को गलत कदम बताते हुए कहा कि इसके लिए उपर्युक्त स्थल ऋषिकेश में आईडीपीएल की 850 एकड़ भूमि रहेगी। बताया गया कि इस भूमि में से 130 एकड़ भूमि में पूर्व कर्मचारी रहते हैं। न्यायालय में मौखिक आदेश पारित होते ही अधिवक्ताओं के बीच खलबली मच गई और सभी बार सभागार में एकत्रित हो गए।
अधिवक्ता इतने नाराज दिखे की वो चलते कोर्ट में सीधे मुख्य न्यायाधीश से मिलने पहुंच गए। अधिवक्ताओं ने अपनी नाराजगी जताई तो न्यायालय ने उन्हें दोपहर दो बजे मिलने को कहा। इस मौके पर हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष डीसीएस रावत, सचिव सौरभ अधिकारी, विजय भट्ट, प्रभाकर जोशी, सय्यद नदीम ‘मून’, विकास गुगलानी, पुष्पा जोशी, रमन साह, ललित बेलवाल, दीपप्रकाश भट्ट, कुर्बान अली, कैलाश तिवारी, सौरभ पाण्डे, दीप जोशी, भुवन रावत, दुष्यंत मैनाली, बीएस मेहता, अजय बिष्ट, सुहैल अहमद सिद्दीकी आदित्य साह आदि सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ता जितेंद्र चौधरी ने बताया कि उनकी याचिका के बाद आदेश लिखाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वो हाईकोर्ट को गौलापार शिफ्ट करने का विरोध करते हैं। गढ़वाल क्षेत्र से आने वाले 70 प्रतिशत लोगों के लिए एक बेंच ऋषिकेश में स्थापित करने का प्रस्ताव किया। बांकी कुमाऊं के 30 प्रतिशत लोगों के लिए कोर्ट नैनीताल ही रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश के इस मौखिक फैसले के बाद अब हाईकोर्ट शिफ्ट करने का मामला गर्मा गया है। गौलापार में हाईकोर्ट शिफ्ट होने के आस लगाए बैठे लोगों को भी झटका लगा है। हालाकि अभी इस पर आखिरी फैसला आना बाकी है।