सक्रिय पहल से आशा का सृजन: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर मनोवैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन

हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय एवं एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी के मनोविज्ञान विभाग एवं एंटी ड्रग सेल के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में ‘सक्रिय पहल से आशा का सृजन’ विषय पर एक दिवसीय मनोवैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन 11 सितम्बर 2026 को उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के सी.डी.एस. जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आत्महत्या की रोकथाम के लिए सामुदायिक एवं व्यक्तिगत स्तर पर सक्रिय पहल को प्रोत्साहित करना तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

कार्यक्रम का शुभारम्भ समाज विज्ञान विद्याशाखा की निदेशक प्रो. रेणु प्रकाश के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या निवारण की दिशा में समाज विज्ञान विद्याशाखा द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रयासों की जानकारी भी साझा की।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीता ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते एकाकीपन की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति अनेक प्रकार के सामाजिक एवं भावनात्मक दबावों से गुजर रहा है। नकारात्मक भावनाओं को भीतर दबाकर रखने के बजाय उन्हें समझना और समय रहते व्यक्त करना आवश्यक है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में परिवार एवं मित्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय पर किया गया हस्तक्षेप किसी व्यक्ति को कठिन परिस्थिति से बाहर आने में सहायता कर सकता है।
निदेशक अकादमिक, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, प्रो. पी.डी. पंत ने कार्यशाला के विषय को विस्तार देते हुए कहा कि जीवन अत्यंत मूल्यवान है और कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। उन्होंने समाज में एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एन.एस. बैंकोटी, प्राचार्य, एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी ने आत्महत्या एवं मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय, विशेषकर विद्यार्थियों के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक विषय बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में समझ विकसित करना आवश्यक है तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कलंक या सामाजिक वर्जना के रूप में देखने के बजाय संवेदनशीलता एवं स्वीकार्यता के साथ समझने की आवश्यकता है।
मुख्य वक्ता डॉ. युवराज पंत, मनोवैज्ञानिक, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी ने मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट का प्रभाव व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को भी स्वास्थ्य एवं जीवन की प्राथमिकताओं में समान स्थान दिया जाना चाहिए।
उप-वक्ता डॉ. तनुश्री गौर, सहायक प्राध्यापक, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता तक पहुंचाने में समुदाय एवं समाज की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज के लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को उचित सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने दयालुता एवं संवेदनशील व्यवहार को मानसिक स्वास्थ्य सहायता का महत्वपूर्ण आधार बताया। डॉ. गौर ने प्रतिभागियों को पाँच चरणों पर आधारित एक व्यावहारिक आकलन प्रक्रिया से अवगत कराया, जिसके माध्यम से ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है जिन्हें हस्तक्षेप एवं सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने आत्महत्या निवारण एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेली-मानस जैसी हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी साझा की।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी ने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निरंतर संवाद एवं जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में व्यक्ति पहले की अपेक्षा अधिक एकाकी होता जा रहा है। ऐसे में करीबी मित्रों एवं परिवार के सदस्यों के साथ अपने विचारों एवं भावनाओं को साझा करना और नियमित रूप से संवाद बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी की युवा टीम द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से आत्महत्या को बढ़ावा देने वाले सामाजिक व्यवहार एवं दृष्टिकोणों पर प्रश्न उठाए तथा आत्महत्या निवारण में सामाजिक मनोविज्ञान एवं सामुदायिक सहयोग की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नुक्कड़ नाटक ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया।
कार्यशाला में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विषय के शोधार्थी द्वारा भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों की सहायता के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए गए। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिनका वितरण प्रो. पी.डी. पंत द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण कर्नाटक, एम.बी.पी.जी. कॉलेज, हल्द्वानी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला का संयोजन डॉ. भाग्यश्री जोशी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं एम.बी.पी.जी. कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला ने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने, आत्महत्या निवारण के लिए समय रहते सक्रिय पहल करने तथा समाज में संवेदनशील, सहायक एवं संवादपरक वातावरण विकसित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।






