उत्तराखण्ड

पिता ने मनाया बेटी के पीरियड्स का ‘जश्न’! काटा केक, लोगों ने दी बधाई

पीरियड्स यानी महिलाओं को होने वाली माहवारी को लेकर समाज में अलग-अलग तरह की सच है। विशेष तौर पर समाज के भीतर इसको लेकर छुआछूत वाली सोच फैली हुई है। उत्तर भारत में पीरियड्स को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी समाज में चली आ रही हैं। लेकिन उत्तराखंड के काशीपुर के रहने वाले एक परिवार ने अपनी बेटी के पहले पीरियड्स को इस तरह सेलिब्रेट किया जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। काशीपुर के रहने वाले जितेंद्र भट्ट ने सोशल मीडिया में कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्ट साझा की। जिसमें जितेंद्र भट्ट लिखा कि…..”बेटी बड़ी हो गई 🥹♥️❤️😍
बेटी रागिनी को periods (मासिक धर्म) शुरू होने की ख़ुशी को आज उत्सव की तरह मनाया …

HAPPY PERIODS RAGINI 💐”

जितेंद्र भट्ट की यह पोस्ट सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है। कुछ लोग जहां जितेंद्र की इस सोच की खुलकर तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग इसे गलत करार दे‌ रहे हैं।‌ काशीपुर के रहने वाले जितेंद्र भट्ट और उनकी पत्नी भावना सती की बेटी है 13 साल की रागिनी। इसी सप्ताह मंगलवार को जितेंद्र भट्ट की पत्नी भावना ने उन्हें बताया कि बेटी रागिनी को पीरियड्स शुरू हो गए हैं। फिर दोनों माता-पिता ने बेटी को एक साथ बैठाया और उसे बताया कि पीरियड्स उसके लिए किस तरह से स्पेशल है। ‌ दोनों माता-पिता नहीं खुलकर बेटी से पीरियड्स के बारे में बात की। इसकी बात तय हुआ रागिनी के पहले पीरियड्स के सेलिब्रेशन का प्रोग्राम। काशीपुर में डांस स्कूल चलाने वाले जितेंद्र भट्ट ने बाकायदा अपने घर में एक पार्टी रखी। एक केक मंगाया। बाकायदा पास पड़ोस के मेहमानों के साथ ही रिश्तेदारों को भी बुलाया गया। और फिर काटा गया रागिनी के पहले पीरियड्स का केक। यही नहीं मेहमान रागिनी के पहले पीरियड शुरू होने पर उसके लिए तरह-तरह के गिफ्ट भी लेकर आए। परिवार ने पूरे सेलिब्रेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की। जहां जितेंद्र और भावना सती की सोच को ज्यादातर लोग सलाम कर रहे हैं।

छुआछूत माना जाता है पहाड़ में पीरियड्स का दौर

उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में पीरियड्स को अच्छा नहीं माना जाता। ‌ पीरियड्स के दौरान विशेष तौर पर शादीशुदा महिलाओं को अशुद्ध मानकर परिवार से दूर रखा जाता है। गांव के इलाकों में तो महिलाओं को परिवार से कहीं दूर रखा जाता है। खाने के लिए भी कोई विशेष चीज नहीं दी जाती। और सोने के लिए भी जमीन पर कोई दरी या हल्क बिस्तर लगाया जाता है। इस दौरान महिला को दूर से ही खाना दिया जाता है। पूरा परिवार महिला से दूर रहता है। महिला को छूना तो दूर उसके कपड़े भी कोई नहीं छूता। 5 से 7 दिन तक चलने वाली पीरियड की अवधि के बाद महिला को गोमूत्र छिड़क कर घर के भीतर लाया जाता है।

इस दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। पहाड़ के कुछ इलाकों में तो महिलाओं को जानवरों के गोठ में तक सोना पड़ता है। लेकिन मूलतः उत्तराखंड के पहाड़ के रहने वाले जितेंद्र भट्ट और उनकी पत्नी की सोच को एक नई सोच करार दिया जा रहा है। बता दें कि दक्षिण भारत में बेटी के पहले पीरियड्स आने पर बड़ा जश्न मनाया जाता है। लेकिन उत्तर भारत में आज भी से सही दृष्टि से नहीं देखा जाता।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad