उत्तराखण्ड

‘नैनी’ ताल में गंदगी जाने के सुबूत मिले तो अग्रेजों ने बंद करा दी थी “सोडा की दुकान”

​लेखक- प्रदीप पांडे, पर्यावरण-इतिहास के जानकार और प्रकृति प्रेमी छायाकार (फोटोग्राफर)

नैनीताल से जुड़े ब्रिटिश रिकॉर्ड्स में मुझे एक प्रकरण मिला था। जब 1850 के दशक में ताल के किनारे से एक सोडा बनाने का छोटा सा संयंत्र लगा। लेकिन नगरपालिका ने इसलिए बंद करवा दिया। क्योंकि इससे ताल में गंदगी जाने के सुबूत मिल रहे थे। पालिका ने ये सख्त एक्शन तब लिया जब उस वक्त नैनी ताल से पानी की सप्लाई नहीं होती थी। यानी इसका पानी पिया नहीं जाता था। बल्कि अनेकों जल स्त्रोत नगर के जलागम क्षेत्र में मौजूद थे। जिनसे पूरे नैनीताल शहर को पेयजल पहुंचता था। मगर फिर भी एक छोटे से संयंत्र के द्वारा नाम मात्र की गंदगी ब्रिटिशर्स और उनके हुक्मरानों से सहन नहीं की गई ।​

ब्रिटिशकालीन तल्लीताल और बी. दास की दुकान

तब के अभिलेखों में नगरपालिका के द्वारा काटे जाने वाले बीसियों किस्म के चालानों का उल्लेख मिलता है मसलन कुत्तों को निषिद्ध समय में घुमाना,मॉल रोड के घरों में कपड़े सड़क की तरफ डाल कर सुखाना, खाने पीने की चीजों की बिक्री में साफ सफाई न रखना आदि आदि,आज कोई ऐसे जुर्माने लगाए जाने की बात करे तो लोग हंसते हंसते पागल हो जाएं ।
नैनीताल के मिजाज़ को सात समुंदर पार के साम्राज्यवादियों ने समझा इसकी सेहत तब तक दुरुस्त रखी जब तक इसे छोड़ कर गए,1970के दशक से इसने जो पतन देखा आज हर दिन नई नीचाई छू रहा है।


इस नाज़ुक मिजाज़ शहर का बदला जा रहा मिजाज़ शहर के बदलते व्यवसायों में भी दिखने लगा है शहर के बेहद प्रतिष्ठित दुकानें, बी दास एंड ब्रदर्स, एलाइड स्टोर, श्याम लाल एंड संस आज समोसे ,केक,मिठाई की दुकानों में तब्दील हो गए मालिकाना हक बदल गया ,लोगों में किताबों और समाचार पत्र पढ़ने की आदत काम से कमतर होने से नारायंस जैसा विख्यात प्रतिष्ठान अपनी छाया मात्र रह गया है। नैनी काष्ठ कला केंद्र के विनोद दा बताते हैं की जब तक में हूं तभी तक ये कला भी है।
आज नैनीताल में हर दूसरी दुकान खाने पीने की दुकान में तब्दील होने को आतुर लगती है, हर आवास होटल में तो हर वाहन टैक्सी होना चाहता हो ऐसा लगने लगा है।


व्यापार प्रबंधन करना एक हुनर है बड़े संस्थानों से एमबीए पढ़े बच्चे किसी भी चीज को इवेंट या अवसर में बदल सकते हैं ,इन्हीं की बदौलत मानसून के आने के समय केरल में टूरिस्ट काम आने लगे तो उन्होंने मानसून टूरिज्म को एक इवेंट बना दिया,तड़क भड़क से लड़े जाने वाले भारतीय चुनावों को दिखाने के वास्ते इन्होंने इलेक्शन टूरिज्म चलाने का विचार दिया, धारावी जैसे स्लम्स में इन्होंने स्लम टूरिज्म चलाने को कार्यरूप दिया,इसी तर्ज पर क्यों न भीड़भाड़ टूरिज्म या congested tourism की शुरुआत नैनीताल से की जाए कि “आइए एक खूबसूरत हिल स्टेशन में जाम का मज़ा लीजिए”

नोट- यह लेख प्रकृति के मशहूर छायाकार, नैनीताल निवासी आदरणीय प्रदीप पांडे जी की फेसबुक वॉल से लिया गया है।

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