चीड़ के फूलों से बने ये वुड क्राफ्ट हैं बेहद आकर्षक, जानिए इनकी खासियत…

चीड़ के फूलों से बने ये वुड क्राफ्ट हैं बेहद आकर्षक, जानिए इनकी खासियतउत्तराखंड का नैनीताल जो पर्यटकों को बेहद पसंद आता हैं अपने इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जानें वाला ये शहर सैलानियों की पसंदीदा जगह हैं. नैनीताल आने वाले पर्यटक गिफ्ट के रूप में यहां की फेमस कैंडल्स, मिठाई, नमकीन और अन्य चीजे ले जाते हैं. इसके आलावा पर्यटकों को यहां के चीड़ यानि पाइन के फूलों से बना वुड क्राफ्ट भी बेहद पसंद आ रहा हैं. चीड़ के कोन से बने ये क्राफ्ट खूबसूरत तो हैं ही लेकिन इसके साथ ही ये जंगल को आग से बचाने का एक जरिया भी हैं और इससे कई लोगो का रोजगार भी जुड़ा हुआ हैं.

दरअसल चीड़ यानि पाइन के पेड़ में लगने वाले इस फूल में एक गोंद पाया जाता है जिसे लीसा कहा जाता हैं जो जल्दी आग को पकड़ लेता हैं जिनसे जंगलों में आग लगने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है, लेकिन नैनीताल और उसके आस पास के ग्रामीण हस्तशिल्प के जरिए बेहतरीन वुड क्राफ्ट बना रहें है, जिससे आय तो अर्जित हो ही रही है साथ ही जंगलों में इन चीड़ के फूलों से लगने वाली आग को भी कम करने का प्रयास कर रहें हैं.

स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि जंगलों में चीड़ के पेड़ों से गिरने वाले फूल जिन्हें ठीठा कहा जाता हैं,उनसे जंगल में आग लगने का खतरा बड़ जाता हैं, जिसे गांव वाले बीन कर लाते हैं. जिसके बाद उनको हस्तशिल्प के जरिए आकार देकर शोपीस बनाया जाता हैं जो पर्यटकों को काफी पसंद आता हैं. आगे बताया की इसे बनाने के लिए 2 से ढाई घंटे का वक्त लगता हैं, जिसमें लकड़ी की पेटी, वार्निश, गोल्डन कलर व तारपीन तेल इस्तेमाल किया जाता हैं. इसके आलावा इसको सजाने के लिए साइकस की पत्ती का भी इस्तेमाल किया जाता हैं जिसे हल्द्वानी, लालकुआं और भुजियाघाट की नर्सरी से खरीदा जाता है इसकी एक पत्ती की कीमत आठ से दस रुपए हैं.

गांव की महिलाएं जंगल में गिरे हुए पाइन के फूल यानी ठीठो को बीन कर लाती है, जिसके बाद इन्हें शोपीस का आकार देकर और वार्निश और कलर करने के बाद कपड़े के फूल बनाकर डेकोरेट किया जाता है. इसके अलावा जंगल में उगने वाली कई घास का इस्तेमाल भी इसके सजावट के लिए किया जाता है.





