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बाबा नीब करौरी के चमत्कारिक किस्से…जिन्हें जान आप भी हो जाएंगे बाबा के मुरीद

उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां आने वाले भक्त बाबा नीब करौरी महाराज, जिन्हें उनके अनुयायी प्रेम से ‘महाराज जी’ कहते हैं। उत्तराखंड सरकारी पर्यटन पोर्टल के अनुसार कैंची धाम आश्रम की स्थापना 1962 में हुई। यहां हनुमान मंदिर समेत कई मंदिर हैं। जून में होने वाला वार्षिक भंडारा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

बाबा से जुड़े चमत्कार!

बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन से जुड़े कई किस्से उनके भक्तों और करीबी अनुयायियों ने अलग-अलग पुस्तकों और संस्मरणों में दर्ज किए हैं। इनमें कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिन्हें भक्त ‘बाबा की लीला’ या चमत्कार के रूप में देखते हैं।

ट्रेन का वह किस्सा

बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़ी सबसे चर्चित कथाओं में उनकी ट्रेन यात्रा से जुड़ी कथा है। भक्तों के बीच प्रचलित इस कथा के अनुसार बाबा को बिना टिकट यात्रा करने के कारण ट्रेन से उतार दिया गया था। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी और अंततः बाबा को वापस ट्रेन में बैठने के लिए कहा गया।

भक्त के बारे में जानते थे बाबा!

    बाबा के करीबी दादा मुखर्जी से जुड़ी एक घटना में बताया गया है कि एक बार वे बिना किसी सूचना के कैंची की ओर निकल पड़े। रास्ते में बाबा से मुलाकात हुई तो बाबा ने उनसे कहा कि वे पिछले कुछ दिनों से उन्हें याद कर रहे थे और उनके आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। दादा मुकर्जी के संस्मरण के अनुसार बाबा ने यहां तक पूछा कि क्या उन्हें उनका टेलीग्राम मिला था, जबकि वह संदेश उनके पहुंचने के बाद घर पर आया था। भक्त इस घटना को बाबा की अद्भुत अंतर्दृष्टि का उदाहरण मानते हैं।

    छाते की कहानी और ‘सुरक्षा’ का संदेश

    बाबा से जुड़ी एक और कहानी उनके भक्त आरपी वैष की है। रामदास संस्था पर प्रकाशित संस्मरण के मुताबिक 1967 में बाबा ने वैष को एक छाता देते हुए कहा था कि इसे अपने साथ रखो। बाद में बाबा ने इसे ‘सुरक्षा देने वाला छाता’ बताया। कई साल बाद इसी भक्त के परिवार से जुड़ी एक चिकित्सकीय घटना सामने आई, जिसे उन्होंने बाबा के पहले दिए गए संकेत से जोड़कर देखा। यह घटना भी बाबा की ‘दूरदृष्टि’ से जुड़ी भक्त-कथाओं में शामिल है।

      बाबा का भक्तों के जीवन में ‘अचानक’ हस्तक्षेप

      बाबा नीब करौरी महाराज के विदेशी भक्तों के संस्मरणों में भी ऐसे कई अनुभव मिलते हैं, जिनमें भक्तों का कहना है कि बाबा उन्हें ऐसी बातें बता देते थे, जिनके बारे में उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी । अमेरिकी चिकित्सक लैरी ब्रिलियंट से जुड़ी एक प्रसिद्ध घटना में बाबा ने उनसे उनके पिछले दिन के बारे में ऐसे सवाल पूछे, जिन्हें सुनकर वे भावुक हो गए। ब्रिलियंट ने बाद में इस अनुभव को अपने जीवन के निर्णायक आध्यात्मिक अनुभवों में से एक माना।

      एक छोटे से आश्रम से दुनिया तक पहुंची बाबा की ख्याति
      कैंची धाम से जुड़ी सबसे बड़ी कहानी शायद किसी एक चमत्कार की नहीं, बल्कि उस प्रभाव की है जो बाबा की शिक्षाओं और व्यक्तित्व ने उनके भक्तों पर डाला।
      1960 के दशक में अमेरिकी आध्यात्मिक साधक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और बाबा नीब करौरी महाराज से मिले। बाद में वे ‘राम दास’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। राम दास की किताब ‘Be Here Now’ और उनके संस्मरणों के जरिए बाबा की ख्याति पश्चिमी दुनिया में भी तेजी से पहुंची।
      यही वजह है कि आज कैंची धाम में भारत के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी दिखाई देते हैं।

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