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UTTARAKHAND: बिना ‘उर्दू’ शब्द इस्तेमाल के पहला कानून बनेगा यूसीसी

देहरादून: उत्तराखंड जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता का कानून लागू होगा। शुक्रवार को जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति अपनी 800 पेज की रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। समिति से अपनी रिपोर्ट में कई अहम बातों और सलाहों को शामिल किया है। लेकिन इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की एक विशेष बात निकलकर सामने आई है। और वो बात है इसकी भाषा। दरअसल उत्तराखंड का यूसीसी आजाद भारत के इतिहास का पहला कानून है जो पूरी तरह हिंदी में है और इसमें उर्दू का कोई शब्द नहीं किया गया है। गौरतलब है कि भारत में कानून की किताबों में अभी तक उर्दू शब्दों भरमार रही है।

इन बातों को किया गया शामिल

इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में लिव-इन-रिलेशनशिप के मामले में रजिस्ट्रेशन या सेल्फ डिक्लरेशन को अनिवार्य करना, हलाला, इद्दत, ट्रिपल तलाक को सजा योग्य अपराध बताने की सिफारिश की गई है।

‘हलाला’ पर सजा!

इस्लाम धर्म में ‘हलाला’ एक ऐसी प्रथा है जिसके तहत एक तलाकशुदा पत्नी को यदि पुराना पति दोबारा से स्वीकार करना चाहता है महिला को किसी गैर मर्द से निकाह करके उसे तलाक देना पड़ता है। ‘इद्दत’ के तहत एक मुस्लिम विधवा या तलाकशुदा महिला को दोबारा शादी करने से पहले एक निश्चित अवधि बितानी पड़ती है।

यूसीसी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में एक से अधिक विवाह पर रोक की भी सिफारिश की गई है। हालांकि, संविधान में प्रदत्त विशेष अधिकारों के चलते अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों को इस दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया गया है। जिनमें भोटिया, बुक्सा, जौनसारी, राजी और थारू जनजातियां शामिल हैं।

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